Amethi:- दुधारू पशुओं को बढ़ती गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाने हेतु पेयजल तथा चारे आधारित उपाय
दुधारू पशुओं को बढ़ती गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाने हेतु पेयजल तथा चारे आधारित उपाय
पशुओं के समक्ष सामान्य तापमान का स्वच्छ एवं ताज़ा पेयजल सदैव उपलब्ध होना चाहिए अर्थात पशु की जब इच्छा करे तब उसे पेयजल उपलब्ध रहे तथा जिस बर्तन में पानी दिया जाये उसे हर दूसरे दिन ढंग से साफ़ किया जाये.
गर्मियों में पशुओं को हरा चारा खिलाना अत्यंत लाभकारी होता है लेकिन गर्मियों में हरे चारे की उपलब्धता सीमित होती है अतः ऐसी स्थिति में आजकल बाजार में उपलब्ध साइलेज (मक्के, मटर फली के छिलके, गन्ना, जई, चुकन्दर आधारित) को पशुओं को सफलतापूर्वक खिलाया जा सकता है.
सूखा चारा पशुओं की खुराक का प्रमुख हिस्सा होता है तथा परंपरागत सूखे चारों (जैसे कि गेंहू/ जौ/ धान का भूसा तथा ज्वार/ बाजरा की कुट्टी) में फाइबर अधिक होता है. अतः अधिक गर्मी के मौसम में पशु, ऐसे चारों को कम खा पाते हैं तथा इनका पाचन भी कम होता है. अतः गर्मियों में पशुओं को कम फाइबर तथा अधिक पाचकता वाला चारा दिया जाना चाहिए जिससे कि गर्मी के मौसम में पशुओं को अधिक पोषक तत्व मिल सकें.
अधिकतर दालों वाले चारे कम फाइबर तथा अधिक पाचकता वाले होते हैं अतः पशु की खुराक में ऐसे चारों को (4 - 5 किग्रा अन्य चारों के साथ) सम्मिलित किया जाना चाहिए.


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