महानुभावों, देवियों और सज्जनों. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति राष्ट्रीय पुरस्कार – 2025 “,

 महानुभावों, देवियों और सज्जनों. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति राष्ट्रीय पुरस्कार – 2025 “,



आज हम एक ऐसे अनुपम अवसर पर एकत्रित हुए हैं, जो केवल पुरस्कार वितरण का नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज सेवा में उत्कृष्टता की महिमा को सेलिब्रेट करने का पर्व है।

स्वागत है आप सभी का डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति राष्ट्रीय पुरस्कार – 2025 में। इस भव्य आयोजन की शुरुआत हुई देवी सरस्वती की वंदना से, जिसमें हम सभी ने न केवल श्रद्धा व्यक्त की, बल्कि शिक्षा और ज्ञान के महत्व को आत्मसात किया। यह पल हमें याद दिलाता है कि शिक्षक केवल किताबें पढ़ाने वाले नहीं होते, वे समाज के निर्माता, राष्ट्र के स्तंभ और भविष्य के निर्माता होते हैं। आज इस मंच पर उपस्थित हैं हमारे मुख्य अतिथि श्री मोहन सिंह बिष्ट जी, उपाध्यक्ष, दिल्ली विधानसभा। श्री बिष्ट जी ने ISRHE और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के योगदान पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा –"शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देते, वे जीवन जीने का साहस, नैतिकता, और समाज की सेवा करने की प्रेरणा देते हैं। ISRHE उन सभी शिक्षकों का सम्मान करता है, जिन्होंने अपने जीवन को **अन्य लोगों की शिक्षा और विकास के लिए समर्पित किया है।"हमारे विशिष्ट अतिथि हैं –डॉ. परविंदर सिंह, एम्बेसडर, वर्ल्ड पीस, यूनाइटेड नेशन्स, जिन्होंने शांति और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया। श्री सुधीर गुप्ता, उपाध्यक्ष, दधीची देह दान समिति, जिन्होंने समाज सेवा और मानवता के प्रति प्रेरित किया। श्रीमती शिखा जोशी, समाजसेवी एवं महिला कार्यकर्ता, जिनकी प्रेरक उपस्थिति ने सभी को गर्वित और प्रेरित किया। इस आयोजन में ISRHE ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षक केवल शिक्षा का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माता हैं।हर शिक्षक एक दीपक है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान, संस्कार और नैतिकता का प्रकाश फैलाता है।

ISRHE देश और विदेश में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता है, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों और शिक्षा के महत्व को समझें। अब हम आते हैं सबसे ऊर्जा और उत्साह से भरे पल की ओर –जब पूरे मंच और सभा में गूंजा ‘जय श्री राम! भारत माता की जय!’।यह उद्घोष केवल शब्द नहीं थे, बल्कि यह हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारे राष्ट्रभक्ति के आदर्शों का प्रतीक बने। हर जयकार ने उपस्थित लोगों के हृदय में गर्व और ऊर्जा भर दी। कार्यक्रम का संचालन कर रही हैं सुश्री गौरी शर्मा और सुश्री गीते शर्मा, जिन्होंने हर पल को खूबसूरती और गरिमा के साथ प्रस्तुत किया। प्रेस और मीडिया का समन्वय कर रहे हैं श्री ओम शर्मा, श्री दीपक उपाध्याय और श्री सुमित, जिन्होंने इस भव्य आयोजन को प्रभावशाली ढंग से पूरे देश और विदेश में पहुँचाया। अब हम समापन सत्र की ओर बढ़ते हैं। समापन सत्र में हमारे मुख्य अतिथि श्री रमेश चन्द्र रत्न जी, पूर्व अध्यक्ष, पीएससी, रेलवे बोर्ड, भारत सरकार, उपस्थित हैं। श्री रत्न जी ने कहा –"शिक्षक केवल ज्ञान का प्रकाश फैलाते नहीं, बल्कि **समाज और राष्ट्र की नींव मजबूत करते हैं। शिक्षक ही वे प्रेरक हैं, जो जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं, देशभक्ति का संचार करते हैं, और हमें उत्कृष्ट नागरिक बनने की दिशा दिखाते हैं।" समापन सत्र में राष्ट्रीय गान ने सभी के हृदय में गर्व और सम्मान की भावना को और भी प्रबल कर दिया। ISRHE ने यह सुनिश्चित किया कि शिक्षा और समाज सेवा में असाधारण योगदान देने वाले शिक्षकों और समाजसेवियों को सभी की नजरों में सम्मान मिले और उनका काम प्रेरणा बने।

देवियों और सज्जनों, आज का यह कार्यक्रम केवल पुरस्कार वितरण नहीं था। यह एक जीवंत उत्सव था शिक्षा, संस्कार, प्रेरणा, उत्साह, देशभक्ति और सामाजिक बदलाव का।

यह हमें याद दिलाता है कि शिक्षक केवल कक्षा के भीतर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के हर कोने में दीपक जलाते हैं।

हम सभी शिक्षकों और समाजसेवियों को नमन करते हैं, और कहते हैं – जय ISRHE! जय शिक्षा! जय हमारे शिक्षकों के योगदान को! जय श्री राम! भारत माता की जय! भारत माता की जय!”

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