Amethi:-जीवन को प्राप्त करने का परम उद्देश्य ही है ईश्वर दर्शन

 जीवन को प्राप्त करने का परम उद्देश्य ही है ईश्वर दर्शन








अमेठी जनपद के ग्राम *भरेथा*, निकट हथकिला चौराहा,  *दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान* के तत्त्वाधान में *दिव्य गुरु सर्वश्री आशुतोष महाराज जी* की कृपा से *सप्त दिवसीय(7-13 जनवरी 2026)श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ* का आयोजन किया जा रहा है।

कथा के *द्वितीय दिवस* में *दिव्य गुरु सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास भागवत भास्कर साध्वी सुश्री पद्म हस्ता भारती जी* ने संगत को *भक्तराज ध्रुव* जी के जीवन प्रसंग पर प्रकाश डाला।

ध्रुव बचपन से ही भक्ति पथ आगे बढ़ पड़ा, उसको पता था कि जीवन का कोई भरोसा नहीं, कब ख़त्म हो जाये।


 इसीलिए ज़ब प्रभु का सन्देश मिल जाये तभी से भक्ति का शुभारम्भ करना चाहिए।

ग्रंथों ने कहा है..I

"दुर्लभो मानुषो देहो देहीनां क्षणभंगुरः।"

मनुष्य का जीवन दुर्लभ के साथ साथ क्षणभंगुर भी है। समय के रहते हुए प्रभु की भक्ति करनी चाहिए।

कबीरदास महाराज जी कहते है-

"झूठी काया झूठी माया आखिर मौत निदान। जीवणा दो दिन का मेहमान। कब सुमिरोगे राम।"

 

"मनुष्य जीवन को प्राप्त करने का परम उद्देश्य ही है ईश्वर दर्शन।"

यदि इस शरीर को प्राप्त करने के बाद हमने ईश्वर का दर्शन नहीं किया तो फिर हमें अनेक योनियों में भ्रमण करना पड़ता है। उपनिषद कहते है - 

"इह चेदसकद बौधुम प्राक्य शरीरस्य विश्रस:। ततः सर्गेषु लोकेषु शरीरत्वाय कल्पते।"

शरीर ख़त्म होने से पहले पहले ईश्वर का दर्शन का कर लेना चाहिए।

ध्रुव ने यही काम किया। 5 वर्ष की आयु में ही ईश्वर को प्राप्त करने के लिए निकल पड़ा।

आज समाज बुढ़ापे का इंतज़ार करता है और कहता है की भक्ति तो वृद्धावस्था में करनी चाहिए।

 ऐसे ही मूढ़ व्यक्ति को समझाने के लिए ही तो भक्तों का जन्म होता है।

दिव्य गुरु सर्व श्री आशुतोष महाराज जी कहते है कि -

"ईश्वर दर्शन करना प्रत्येक मनुष्य का जन्म सिद्ध अधिकार है। सबके घट के अंदर ईश्वर है तो सभी को उसका दर्शन करना चाहिए।"

 ध्रुव प्रसंग में सभी भक्त खूब भाव विभोर हुए और फूट फूट कर रोये भी।

कथा में स्वामी विश्वनाथानन्द जी, स्वामी शिवशरणानन्द जी, साध्वी राधा माता जी विराजमान रहें।

गणमान्य अतिथियों की भी गरिमामयी उपस्थित रही।

श्री राजेश अग्रहरि ( राजेश मसाला), जिला पंचायत अध्यक्ष, अमेठी, श्री कमलाकान्त मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष विहिप, अमेठी, श्री विवेक के. के. मिश्रा, राज्य निदेशक, प्रकृति कल्याण परिषद ( उ. प्र.), श्री राजमणि मिश्रा, श्री राकेश अग्रवाल, व्यवसायी, अमेठी, श्री बलवंत सिंह,श्री श्याम नारायण ओझा, वरिष्ठ समाज सेवी, अमेठी,श्री राम ताड़क शुक्ला,  श्री अखंड प्रताप सिंह, समाज सेवी,श्री श्याम सोनी,टिकरी, अमेठी।

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